आयोजन
रुद्राभिषेक

"रूद्र अर्थात भगवान् शिव" एवं रुद्राभिषेक का अर्थ शिवलिंग पर भगवान शिव का रुद्र के मंत्रों द्वारा जल अभिषेक करना। श्रावण (सावन) मास में रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सह परिवार शिवरात्रि, प्रदोष और सावन के सोमवार पर भगवान् शिव का रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी माना गया है। शिव जी को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ साधन है रुद्राभिषेक करना। श्रेष्ठ ब्राह्मण विद्वानों के द्वारा विधिवत रूद्र मन्त्रों द्वारा भगवान् शिव के अभिषेक का उल्लेख शिव पुराण में भी किया गया है। सावन माह 14 जुलाई 2022 गुरुवार से आरम्भ होकर 12 अगस्त 2022 शुक्रवार "रक्षा बंधन" तक मनाया जाएगा। भारत में श्रावण मास का आगमन प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु के समय ही होता है। पृथ्वी पर चारों ओर प्रकृति अपने सुंदर रंग बिखेरती दिखाई देती है। श्रावण के पावन महीने में शिव भक्तों के द्वारा काँवर यात्रा का आयोजन किया जाता है। लाखों शिव भक्त देवभूमि उत्तराखंड में स्थित शिवनगरी हरिद्वार और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं। वे इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी काँवड़ को अपने कंधों रखकर पैदल लाते हैं और वह गंगा जल शिवरात्रि को भगवान् भोलेनाथ को चढ़ाया जाता है। सावन में होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को काँवरिया अथवा काँवड़िया कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक हलाहल विष भी था, जिससे सृष्टि नष्ट होने का भय था। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। कहते हैं रावण शिव का सच्चा भक्त था। वह काँवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसने शिवलिंग का अभिषेक किया और तब जाकर भगवान शिव को इस विष से मुक्ति मिली।

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