आयोजन
श्रावण मास

रुद्रात्प्रवर्तते बीजं बीजयोनिर्जनार्दन:।। 
यो रुद्र: स स्वयं ब्रह्मा यो ब्रह्मा स हुताशन:। 
ब्रह्मविष्णुमयो रुद्र अग्नीषोमात्मकं जगत्।। 

अर्थात:- रूद्र ही ब्रह्मा, विष्णु है सभी देवता रुद्र के ही अंश हैं और सृष्टि में सभी की उत्पत्ति रुद्र से ही हुई  है। इससे यह सिद्ध होता है कि रुद्र ही ब्रह्म है, वह ही स्वयम्भू है। 

श्रावण माह (सावन  महीना ) भगवान शिव एवं माँ पार्वती को समर्पित यह माह सनातन संस्कृति में अत्यंत महत्व रखता है। प्रत्येक हिन्दू सावन के इस पवित्र माह में  भगवान् शिव एवं माँ पार्वती को साक्षी मानकर शिव परिवार के साथ रुद्राभिषेक पूजन करता है। रूद्र मन्त्रों के द्वारा ब्राह्मण शिव लिंग का पंचामृत द्वारा पवित्र  स्नान कराते हैं। तत्पश्चात जलाभिषेक करते हैं, बेल पत्र, वस्त्र आदि समर्पित करते हैं। भगवान् शिव एवं शिव परिवार को फलाहार का भोग लगाया जाता है। रूद्र अर्थात साक्षात् देवों के देव नील कंठ भगवान् शिव।  " रुतम - दुःखम, द्राव्यति - नाशयतीतिरुद्रः। " अर्थ यह है भगवान् भोले नाथ सभी दुःखों को हर लेते हैं उन्हें नष्ट कर देतें हैं।

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