आयोजन
श्रावण(सावन) का महीना

श्रावण(सावन) माह हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवा महीना होता है।  इसे वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है। श्रावण(सावन) मास  भगवान् शिव को विशेष प्रिय है। इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से श्रद्धालुओं को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है और उसकी सभी इछाएं पूर्ण होती है। 

श्रावण(सावन) महीने के विषय में सबसे प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार भगवान् शिव की अर्धांगिनी देवी सती के अपने पिता दक्ष के यज्ञ में योगशक्ति द्वारा देह त्यागने से पूर्व उन्होंने भगवान् शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में प्राप्त करने का प्रण किया था। इसीलिए उन्होंने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में भगवान शिव जी की पूजा की और सावन के महीने में कठोर तप किया माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया था और उन्हें पत्नी के रुप में स्वीकार किया था। 
इसी काल में भगवान् शिव श्रीहरि के साथ मिलकर लीला करते हैं।  इसीलिए सावन का महीना शिव और पार्वती दोनों को बेहद प्रिय है। सोमवार का व्रत करने से चंद्रग्रह अखंड होता है।  पौराणिक मान्यता है अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत अत्यंत लाभदायी होता है। 16 सोमवार के व्रत करने पर कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है। 

श्रावण(सावन) माह में प्रत्येक सनातनी को प्रतिदिन मंदिर जाकर शिव लिंग पर जल चढ़ाना चाहिए एवम भगवान् शिव की आराधना करनी चाहिए। श्रावण(सावन) माह में कावड़ द्वारा गंगा जी से जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने की प्रथा भी अनादि काल से चली आ रही है।